अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तरपन होम करहिं बिधि नाना। बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना।।
मूल पाठ
तरपन होम करहिं बिधि नाना। बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना।।
तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी। सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।
स्रोत अभिलेख 2.129 · पुस्तक पृ. 451, 451
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो अनेकों प्रकारसे तर्पण और हवन करते हैं, तथा ब्राह्मणोंको भोजन कराकर बहुत दान देते हैं; तथा जो गुरुको हृदयमें आपसे भी अधिक (बड़ा) जानकर सर्वभावसे सम्मान करके उनकी सेवा करते हैं;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 451 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तरपन होम करहिं बिधि नाना। बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना।।
English explanation
They perform ritual libations and fire offerings in various prescribed ways, feed Brahmins, and give abundant gifts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तरपन | तर्पण, जलादि की अनुष्ठानिक अर्पणा | ritual libations |
| होम | अग्नि में आहुति | fire offerings |
| करहिं | करते हैं | perform |
| बिधि | विधियों से | by ritual procedures |
| नाना | अनेक | various |
| बिप्र | ब्राह्मणों को | Brahmins |
| जेवाँइ | भोजन कराकर | having fed |
| देहिं | देते हैं | give |
| बहु | बहुत | abundant |
| दाना | दान | charitable gifts |
2 तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी। सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।
English explanation
Holding their teacher in their hearts in even higher regard than you, they serve the teacher wholeheartedly and respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप, राम | you, Rama |
| तें | से | than |
| अधिक | अधिक माननीय | in higher regard |
| गुरहि | गुरु को | their spiritual teacher |
| जियँ | हृदय में | in their hearts |
| जानी | मानकर | regarding |
| सकल | समस्त, पूरे | whole, complete |
| भायँ | भाव से | with devotion |
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serve |
| सनमानी | सम्मानपूर्वक | with respect |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 451
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 451, 451
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।