अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
मूल पाठ
चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा। पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा।।
स्रोत अभिलेख 2.129 · पुस्तक पृ. 451, 451
भावार्थ
मूल पाठ के बादतथा जिनके चरण श्रीरामचन्द्रजी (आप) के तीर्थोंमें चलकर जाते हैं; हे रामजी! आप उनके मनमें निवास कीजिये। जो नित्य आपके [रामनामरूप] मन्त्रराजको जपते हैं और परिवार (परिकर)-सहित आपकी पूजा करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 451 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
English explanation
O Rama, dwell in the minds of those whose feet journey to places of pilgrimage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरण, पैर | feet |
| राम | हे राम | O Rama |
| तीरथ | तीर्थस्थलों को | to pilgrimage places |
| चलि | चलकर | walking |
| जाहीं | जाते हैं | go |
| राम | हे राम | O Rama |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| तिन्ह | उन भक्तों | those devotees |
| के | के | of |
| मन | मन | minds |
| माहीं | में | in |
2 मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा। पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा।।
English explanation
They daily repeat your supreme mantra and worship you together with your family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंत्रराजु | मंत्रों में श्रेष्ठ मंत्र | the supreme mantra |
| नित | नित्य | daily |
| जपहिं | जप करते हैं | repeat devotionally |
| तुम्हारा | आपका, राम का | your, Rama’s |
| पूजहिं | पूजा करते हैं | worship |
| तुम्हहि | आपको, राम को | you, Rama |
| सहित | साथ | together with |
| परिवारा | आपके परिवार के | your family |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 451
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 451, 451
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।