अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।।
मूल पाठ
तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।।
तिन्ह कै गति मोहि संकर देऊ। जननी जौं यहु जानौं भेऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.168 · पुस्तक पृ. 482, 483
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो वेदमार्गको छोड़कर वाम (वेदप्रतिकूल) मार्गपर चलते हैं; जो ठग हैं और वेष बनाकर जगत्को छलते हैं; हे माता! यदि मैं इस भेदको जानता भी होऊँ तो शंकरजी मुझे उन लोगोंकी गति दें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 483 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।।
English explanation
Those who abandon the Vedic path and follow a contrary course, deceiving the world by assuming a deceptive guise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| श्रुतिपंथु | वेदों का मार्ग | the Vedic path |
| बाम | विपरीत; अनुचित | contrary; improper |
| पथ | मार्ग पर | on a path |
| चलहीं | चलते हैं | walk; follow |
| बंचक | ठगने वाला; छलपूर्ण | deceptive |
| बिरचि | बनाकर; रचकर | having fashioned |
| बेष | वेश; बाहरी रूप | guise; outward appearance |
| जगु | संसार के लोगों को | the people of the world |
| छलहीं | छलते हैं | deceive |
2 तिन्ह कै गति मोहि संकर देऊ। जननी जौं यहु जानौं भेऊ।।
English explanation
Mother, if I knew of this secret, may Shiva give me those people's fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कै | की | of |
| गति | गति; अंतिम दशा | fate; eventual state |
| मोहि | मुझे | to me |
| संकर | भगवान शिव | Shiva |
| देऊ | दें | may grant |
| जननी | हे माता | O mother |
| जौं | यदि | if |
| यहु | यह | this |
| जानौं | मैं जानता हूँ | I know |
| भेऊ | भेद; गुप्त बात | secret; concealed matter |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.168
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 483
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 482, 483
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