अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।।
मूल पाठ
जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।।
जे न भजहिं हरि नरतनु पाई। जिन्हहि न हरि हर सुजसु सोहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.168 · पुस्तक पृ. 482, 483
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनका सत्सङ्गमें प्रेम नहीं है; जो अभागे परमार्थके मार्गसे विमुख हैं; जो मनुष्यशरीर पाकर श्रीहरिका भजन नहीं करते; जिनको हरि-हर (भगवान् विष्णु और शंकरजी) का सुयश नहीं सुहाता;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 483 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।।
English explanation
Those who have no love for the company of the virtuous are unfortunate, turned away from the path of spiritual good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| नहिं | नहीं | not |
| साधुसंग | साधुओं की संगति में | in the company of the virtuous |
| अनुरागे | प्रेम रखते; अनुरक्त हैं | are lovingly attached |
| परमारथ | परम हित; आध्यात्मिक कल्याण का | of spiritual good |
| पथ | मार्ग | path |
| बिमुख | विमुख; मुँह मोड़े हुए | turned away |
| अभागे | अभागे लोग | unfortunate people |
2 जे न भजहिं हरि नरतनु पाई। जिन्हहि न हरि हर सुजसु सोहाई।।
English explanation
Those who, despite obtaining a human body, do not worship Hari, and who take no delight in the noble glory of Hari and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| न | नहीं | not |
| भजहिं | भजन; उपासना करते हैं | worship |
| हरि | भगवान विष्णु का | Hari, Lord Vishnu |
| नरतनु | मानव शरीर | a human body |
| पाई | पाकर | having obtained |
| जिन्हहि | जिन्हें | to whom |
| न | नहीं | not |
| हरि | भगवान विष्णु का | of Hari, Lord Vishnu |
| हर | शिव का | of Shiva |
| सुजसु | सुंदर यश | noble glory |
| सोहाई | अच्छा लगता है | is pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.168
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 483
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 482, 483
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।