अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।।
मूल पाठ
जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।।
तस उतपातु तात बिधि कीन्हा। मुनि मिथिलेस राखि सबु लीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.305 · पुस्तक पृ. 599, 600
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि बिना समयके (संध्यासे पूर्व ही) सूर्य अस्त हो जाय तो कहो जगत्में किसको क्लेश न होगा? हे तात! उसी प्रकारका उत्पात विधाताने यह (पिताकी असामयिक मृत्यु) किया है। पर मुनि महाराजने तथा मिथिलेश्वरने सबको बचा लिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 599 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।।
English explanation
If the sun were to set before its proper time, tell me, who in the world would not suffer?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| बिनु | बिना | without |
| अवसर | उचित समय | the proper time |
| अथवँ | अस्त हो जाए | were to set |
| दिनेसू | सूर्य | the sun |
| जग | संसार में | in the world |
| केहि | किसे | to whom |
| कहहु | बताइए | tell me |
| न | नहीं | not |
| होइ | होगा | would there be |
| कलेसू | कष्ट | distress |
2 तस उतपातु तात बिधि कीन्हा। मुनि मिथिलेस राखि सबु लीन्हा।।
English explanation
Dear brother, Providence brought about just such a calamity; the sage and the king of Mithila saved everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तस | वैसा ही | just such |
| उतपातु | संकट | calamity |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| बिधि | विधाता ने | Providence |
| कीन्हा | उत्पन्न किया | brought about |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| मिथिलेस | मिथिला के राजा जनक ने | Janaka, king of Mithila |
| राखि | रक्षा कर | by protecting |
| सबु | सबको | everyone |
| लीन्हा | लिया | saved |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.305
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 599
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 599, 600
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।