अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।।
मूल पाठ
तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।।
नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू।।
स्रोत अभिलेख 2.305 · पुस्तक पृ. 599, 600
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! पिताजीके बिना (उनकी अनुपस्थितिमें) हमारी बात केवल गुरुवंशकी कृपाने ही सम्हाल रखी है; नहीं तो हमारे समेत प्रजा, कुटुम्ब, परिवार सभी बर्बाद हो जाते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 599 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।।
English explanation
Dear brother, without Father, our affairs have been sustained solely by the grace of the guru's household.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| तात | पिता | Father |
| बिनु | के बिना | without |
| बात | स्थिति और कामकाज | affairs |
| हमारी | हमारी | our |
| केवल | केवल | solely |
| गुरुकुल | गुरु के कुल की | of the guru's household |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| सँभारी | सँभाली गई है | has been sustained |
2 नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू।।
English explanation
Otherwise, the subjects, relatives, and household—all of them, including us—would have fallen into distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नतरु | नहीं तो | otherwise |
| प्रजा | राज्य की जनता | the subjects |
| परिजन | संबंधी और निकटजन | relatives and close associates |
| परिवारू | परिवार | the household |
| हमहि | हमें भी | us too |
| सहित | साथ लेकर | including |
| सबु | सब | all |
| होत | हो जाते | would have become |
| खुआरू | दुर्दशाग्रस्त | distressed and ruined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.305
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 599
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 599, 600
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।