अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।।
मूल पाठ
तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।।
मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा। तदपि कहउँ अवसर अनुसारा।।
स्रोत अभिलेख 2.305 · पुस्तक पृ. 599, 600
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमको सबके कर्मों (कर्तव्यों) का और अपने तथा मेरे परम हितकारी धर्मका पता है। यद्यपि मुझे तुम्हारा सब प्रकारसे भरोसा है, तथापि मैं समयके अनुसार कुछ कहता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 599 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।।
English explanation
You know everyone's deeds, as well as your own and my highest good and duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपको | to you |
| बिदित | ज्ञात | known |
| सबही | सबका | everyone |
| कर | का | of |
| करमू | कर्म | deeds |
| आपन | अपना | your own |
| मोर | मेरा | my |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| हित | कल्याण | good |
| धरमू | धर्म और कर्तव्य | duty and right conduct |
2 मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा। तदपि कहउँ अवसर अनुसारा।।
English explanation
I trust you in every way; nevertheless, I speak as the occasion requires.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | to me |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| भरोस | विश्वास | trust |
| तुम्हारा | आप पर | in you |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| अवसर | अवसर के | the occasion |
| अनुसारा | अनुसार | according to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.305
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 599
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 599, 600
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