अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।।
मूल पाठ
जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।।
प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 355, 356
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो विधाता कृपा करके जन्म दें तो [यह भी दें कि] श्रीरामचन्द्र पुत्र और सीता बहू हों। श्रीराम मुझे प्राणोंसे भी अधिक प्रिय हैं। उनके तिलकसे (उनके तिलककी बात सुनकर) तुझे क्षोभ कैसा?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 356 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।।
English explanation
If the Creator graciously grants me another birth, may Rama and Sita be my son and daughter-in-law.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| बिधि | विधाता; सृष्टिकर्ता | the Creator |
| जनमु | जन्म; पुनर्जन्म | birth; another birth |
| देइ | दे | grants |
| करि | करके | having shown |
| छोहू | कृपा; स्नेह | kindness; gracious affection |
| होहुँ | हों; बनें | may they be |
| राम | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| पूत | पुत्र | son |
| पुतोहू | पुत्रवधू | daughter-in-law |
2 प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें।।
English explanation
Rama is dearer to me than life itself; why are you distressed at his royal consecration?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रान | प्राण; जीवन | life |
| तें | से | than |
| अधिक | अधिक | more |
| रामु | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोरें | मुझे | to me |
| तिन्ह | उन | him |
| कें | के | his; of |
| तिलक | राजतिलक | royal consecration |
| छोभु | क्षोभ; मन की व्याकुलता | distress; agitation |
| कस | क्यों | why |
| तोरें | तुझे; तेरे मन में | in you; for you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 356
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 355, 356
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।