अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरामको सहज स्वभावसे सब माताएँ कौसल्याके समान ही प्यारी हैं। मुझपर तो वे विशेष प्रेम करते हैं। मैंने उनकी प्रीतिकी परीक्षा करके देख ली है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 356 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।।
मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 355, 356
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।।
English explanation
By his very nature, all his mothers are as dear to Rama as Kausalya is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | कौसल्या, राम की जन्मदात्री माता | Kausalya, Rama’s birth mother |
| सम | के समान | as much as; like |
| सब | सभी | all |
| महतारी | माताएँ | mothers |
| रामहि | राम को | to Rama |
| सहज | सहज; जन्मजात | innate; natural |
| सुभायँ | स्वभाव से | by disposition |
| पिआरी | प्रिय | dear |
2 मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी।।
English explanation
Rama shows me particular affection; I have tested his love and seen this for myself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| करहिं | करते हैं | shows; gives |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| बिसेषी | विशेष; अधिक | particular; special |
| मैं | मैंने | I |
| करि | करके | having made |
| प्रीति | प्रेम की | of love |
| परीछा | परीक्षा | test |
| देखी | देखा; अनुभव किया | saw; verified |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 356
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 355, 356
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।