अयोध्याकाण्ड · दोहा 15 · दोहा/सोरठा
भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।
भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।
हरष समय बिसमउ करसि कारन मोहि सुनाउ।।15।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 355, 356
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।
तुझे भरत की सौगंध है; छल और छिपाव छोड़कर सच कह।
English explanation
I put you under oath by Bharata: abandon deceit and concealment, and tell the truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की, कैकेयी के पुत्र की | by Bharata, Kaikeyi’s son |
| सपथ | सौगंध; शपथ | oath |
| तोहि | तुझे | to you |
| सत्य | सच | the truth |
| कहु | कह | tell |
| परिहरि | छोड़कर | abandoning |
| कपट | छल | deceit |
| दुराउ | छिपाव; बात छिपाना | concealment |
2 हरष समय बिसमउ करसि कारन मोहि सुनाउ।।15।।
आनंद के समय तू यह उलझन पैदा कर रही है; इसका कारण मुझे बता।
English explanation
At a time of joy, you are creating this disquiet; tell me the reason.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरष | आनंद; हर्ष | joy |
| समय | समय; अवसर पर | at a time |
| बिसमउ | उलझन; असमंजस | disquiet; perplexity |
| करसि | तू करती है | you create |
| कारन | कारण | reason |
| मोहि | मुझे | to me |
| सुनाउ | बता; सुना | tell; explain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 15
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 355, 356
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