अयोध्याकाण्ड · दोहा 14 · दोहा/सोरठा
काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।
काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।
तिय बिसेषि पुनि चेरि कहि भरतमातु मुसुकानि।।14।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.14 · पुस्तक पृ. 354, 355
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।
काने, लँगड़े और कुबड़े लोगों को कुटिल और बुरी चाल चलने वाला जानो।
English explanation
Know one-eyed, lame, and hunchbacked people to be crooked and scheming.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काने | एक आँख से दृष्टिहीन लोग | one-eyed people |
| खोरे | लँगड़े लोग | lame people |
| कूबरे | कुबड़े लोग | hunchbacked people |
| कुटिल | कुटिल | crooked; deceitful |
| कुचाली | बुरी चाल चलने वाले | scheming; ill-conducted |
| जानि | समझो; जानो | consider; know |
2 तिय बिसेषि पुनि चेरि कहि भरतमातु मुसुकानि।।14।।
विशेषकर स्त्री, और फिर दासी—ऐसा कहकर भरत की माता कैकेयी मुस्कराईं।
English explanation
Especially a woman, and still more a maidservant—having said this, Bharata’s mother Kaikeyi smiled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिय | स्त्री | a woman |
| बिसेषि | विशेषकर | especially |
| पुनि | फिर और भी | still more |
| चेरि | दासी | a maidservant |
| कहि | कहकर | having said |
| भरतमातु | भरत की माता कैकेयी | Kaikeyi, Bharata’s mother |
| मुसुकानि | मुस्कराईं | smiled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14
- स्रोत अभिलेख
- 2.14
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 354, 355
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