अयोध्याकाण्ड · दोहा 16 · दोहा/सोरठा
गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि।
गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि।
सुरमाया बस बैरिनिहि सुह्द जानि पतिआनि।।16।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 356, 357
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि।
उस स्त्री के भीतर गहरा कपट छिपाए हुए मधुर वचन सुनकर अस्थिर बुद्धिवाली रानी—
English explanation
Hearing that woman's sweet words, which concealed deep deceit, the queen of unsteady judgment—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गूढ़ | छिपा हुआ; गहरा | hidden; deep |
| कपट | छल | deceit |
| प्रिय | मधुर; मनभावन | sweet; pleasing |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| तीय | स्त्री के | of the woman |
| अधरबुधि | अस्थिर बुद्धिवाली | of unsteady judgment |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
2 सुरमाया बस बैरिनिहि सुह्द जानि पतिआनि।।16।।
देवताओं की माया के वश में होकर शत्रु को हितैषी समझ बैठी और उस पर विश्वास कर लिया।
English explanation
Under the sway of the gods' illusion, she took her enemy for a well-wisher and trusted her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरमाया | देवताओं की माया | the gods' illusion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| बैरिनिहि | शत्रु स्त्री को | the female enemy |
| सुह्द | हितैषी; मित्र | well-wisher; friend |
| जानि | समझकर | taking to be |
| पतिआनि | विश्वास कर लिया | trusted; believed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 16
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 356, 357
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