अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।।
मूल पाठ
जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।।
मोरें सरन रामहि की पनही। राम सुस्वामि दोसु सब जनही।।
स्रोत अभिलेख 2.234 · पुस्तक पृ. 538, 539
भावार्थ
मूल पाठ के बादचाहे मलिन-मन जानकर मुझे त्याग दें, चाहे अपना सेवक मानकर मेरा सम्मान करें (कुछ भी करें); मेरे तो श्रीरामचन्द्रजीकी जूतियाँ ही शरण हैं। श्रीरामचन्द्रजी तो अच्छे स्वामी हैं, दोष तो सब दासका ही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 538 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।।
English explanation
AI draft: Whether Rama rejects me, judging my heart impure, or honors me, accepting me as his servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | चाहे | whether |
| परिहरहिं | त्याग दें | reject me |
| मलिन | मलिन; दूषित | impure |
| मनु | मेरा मन | my heart |
| जानी | जानकर | judging to be |
| जौ | चाहे | or whether |
| सनमानहिं | सम्मान दें | honor me |
| सेवकु | अपना सेवक | his servant |
| मानी | मानकर | accepting as |
2 मोरें सरन रामहि की पनही। राम सुस्वामि दोसु सब जनही।।
English explanation
For me, Rama’s sandals alone are refuge. Rama is an excellent master; all fault lies with the servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरें | मेरे लिए | for me |
| सरन | शरण; आश्रय | refuge |
| रामहि | राम ही | Rama himself |
| की | की | belonging to |
| पनही | पादुकाएँ; जूतियाँ | sandals |
| राम | राम | Rama |
| सुस्वामि | उत्तम स्वामी | excellent master |
| दोसु | दोष | fault |
| सब | सारा | all |
| जनही | सेवक का ही | the servant’s alone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.234
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 538
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 538, 539
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।