अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।।
मूल पाठ
जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।।
अस मन गुनत चले मग जाता। सकुच सनेहँ सिथिल सब गाता।।
स्रोत अभिलेख 2.234 · पुस्तक पृ. 538, 539
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में यशके पात्र तो चातक और मछली ही हैं, जो अपने नेम और प्रेमको सदा नया बनाये रखनेमें निपुण हैं। ऐसा मनमें सोचते हुए भरतजी मार्गमें चले जाते हैं। उनके सब अङ्ग संकोच और प्रेमसे शिथिल हो रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 538 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।।
English explanation
The rain-seeking bird and the fish merit praise in the world, accomplished and ever fresh in their steadfast observance and love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | संसार में | in the world |
| जस | यश | praise |
| भाजन | पात्र | worthy recipients |
| चातक | वर्षाजल की बाट देखने वाला चातक पक्षी | the bird that awaits rainwater |
| मीना | मछली | fish |
| नेम | नियम; निष्ठापूर्ण व्रत | steadfast observance |
| पेम | प्रेम | love |
| निज | अपने | their own |
| निपुन | निपुण; दृढ़ साधक | accomplished |
| नबीना | नए; सदा ताजे | ever fresh |
2 अस मन गुनत चले मग जाता। सकुच सनेहँ सिथिल सब गाता।।
English explanation
Reflecting thus within, Bharata continued along the road; apprehension and love left his whole body weak.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | इस प्रकार | thus |
| मन | मन में | within his mind |
| गुनत | विचार करते | reflecting |
| चले | चले | proceeded |
| मग | मार्ग पर | along the road |
| जाता | जाते हुए | going onward |
| सकुच | संकोच; आशंका | apprehension |
| सनेहँ | प्रेम से | from love |
| सिथिल | शिथिल | weakened |
| सब | सारा | whole |
| गाता | शरीर; अंग | body; limbs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.234
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 538
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 538, 539
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।