अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो हठ करके (कैकेयीकी बातको पूरा करनेमें अड़े रहकर) स्वयं सब दु:खोंके पात्र हो गये। स्त्रीके विशेष वश होनेके कारण मानो उसका ज्ञान और गुण जाता रहा। एक (दूसरे) जो धर्मकी मर्यादाको जानते हैं और सयाने हैं, वे राजाको दोष नहीं देते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 383 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु।।
एक धरम परमिति पहिचाने। नृपहि दोसु नहिं देहिं सयाने।।
स्रोत अभिलेख 2.48 · पुस्तक पृ. 383, 384
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु।।
English explanation
Through obstinacy he became the recipient of every sorrow; under a woman's sway, his wisdom and virtues seemed to have departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो राजा | the king who |
| हठि | हठ करके | through obstinacy |
| भयउ | हो गया | became |
| सकल | सभी | all |
| दुख | दुखों का | of sorrows |
| भाजनु | पात्र | recipient |
| अबला | स्त्री के | of a woman |
| बिबस | वश में | under the sway |
| ग्यानु | ज्ञान | wisdom |
| गुनु | गुण | virtues |
| गा | चला गया | departed |
| जनु | मानो | as though |
2 एक धरम परमिति पहिचाने। नृपहि दोसु नहिं देहिं सयाने।।
English explanation
Some discerning people, recognizing the bounds of duty, do not blame the king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ लोग | some people |
| धरम | धर्म की | of duty |
| परमिति | मर्यादा | bounds |
| पहिचाने | पहचानकर | recognizing |
| नृपहि | राजा को | to the king |
| दोसु | दोष | blame |
| नहिं | नहीं | not |
| देहिं | देते हैं | assign |
| सयाने | समझदार लोग | discerning people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 383
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 383, 384
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।