अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई। महि सोवत तेइ राम गोसाईं।।
मूल पाठ
जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई। महि सोवत तेइ राम गोसाईं।।
पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ। ससुर सुरेस सखा रघुराऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.91 · पुस्तक पृ. 418, 419
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब जिनकी अपने प्राणोंकी तरह सार-सँभार करते थे, वही प्रभु श्रीरामचन्द्रजी आज पृथ्वीपर सो रहे हैं। जिनके पिता जनकजी हैं, जिनका प्रभाव जगत्में प्रसिद्ध है; जिनके ससुर इन्द्रके मित्र रघुराज दशरथजी हैं,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 419 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई। महि सोवत तेइ राम गोसाईं।।
English explanation
The very Lord Rama whom all these people cherished like their own lives is sleeping on the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगवहिं | सँभालते, सहेजते थे | cherished and cared for |
| जिन्हहि | जिनको | whom |
| प्रान | अपने प्राणों | their own lives |
| की | के | of |
| नाई | समान, तरह | like |
| महि | धरती पर | on the ground |
| सोवत | सो रहे हैं | are sleeping |
| तेइ | वही | that very |
| राम | राम | Rama |
| गोसाईं | स्वामी, प्रभु | lord; master |
2 पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ। ससुर सुरेस सखा रघुराऊ।।
English explanation
Sita’s father is Janaka, whose glory is renowned throughout the world; her father-in-law is Dasharatha, king of the Raghu line and friend of Indra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिता | सीता के पिता | Sita’s father |
| जनक | मिथिला के राजा जनक | Janaka, king of Mithila |
| जग | जगत में | in the world |
| बिदित | प्रसिद्ध | renowned |
| प्रभाऊ | प्रताप, महिमा | glory and might |
| ससुर | सीता के ससुर | Sita’s father-in-law |
| सुरेस | देवराज इंद्र के | of Indra, king of the gods |
| सखा | मित्र | friend |
| रघुराऊ | रघुवंश के राजा दशरथ | Dasharatha, king of the Raghu line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 419
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 418, 419
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।