अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ते सिय रामु साथरीं सोए। श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए।।
मूल पाठ
ते सिय रामु साथरीं सोए। श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए।।
मातु पिता परिजन पुरबासी। सखा सुसील दास अरु दासी।।
स्रोत अभिलेख 2.91 · पुस्तक पृ. 418, 419
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही श्रीसीता और श्रीरामजी आज घास-फूसकी साथरीपर थके हुए बिना वस्त्रके ही सोये हैं। ऐसी दशामें वे देखे नहीं जाते। माता, पिता, कुटुम्बी, पुरवासी (प्रजा), मित्र, अच्छे शील- स्वभावके दास और दासियाँ—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 418 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ते सिय रामु साथरीं सोए। श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए।।
English explanation
Those very Sita and Rama lie asleep on a grass bed, though they were never seen without silken garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे ही | those very |
| सिय | सीता | Sita |
| रामु | राम | Rama |
| साथरीं | घास के बिछौने पर | on a grass bed |
| सोए | सोए हैं | lie asleep |
| श्रमित | रेशमी | silken |
| बसन | वस्त्रों के | garments |
| बिनु | बिना | without |
| जाहिं | जिन्हें | whom |
| न | नहीं | not |
| जोए | देखा गया | were seen |
2 मातु पिता परिजन पुरबासी। सखा सुसील दास अरु दासी।।
English explanation
Mother and father, relatives, townspeople, virtuous friends, and male and female attendants—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता | mother |
| पिता | पिता | father |
| परिजन | परिवार के लोग | relatives |
| पुरबासी | नगर के निवासी | townspeople |
| सखा | मित्र | friends |
| सुसील | सुशील, अच्छे स्वभाव वाले | virtuous; good-natured |
| दास | सेवक | male attendants |
| अरु | और | and |
| दासी | सेविकाएँ | female attendants |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 418
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 418, 419
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