अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबिध बसन उपधान तुराई। छीर फेन मृदु बिसद सुहाई।।
मूल पाठ
बिबिध बसन उपधान तुराई। छीर फेन मृदु बिसद सुहाई।।
तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं। निज छबि रति मनोज मदु हरहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.91 · पुस्तक पृ. 418, 419
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ [ओढऩे-बिछानेके] अनेकों वस्त्र, तकिये और गद्दे हैं, जो दूधके फेनके समान कोमल, निर्मल (उज्ज्वल) और सुन्दर हैं; वहाँ (उन चौबारोंमें) श्रीसीताजी और श्रीरामचन्द्रजी रातको सोया करते थे और अपनी शोभासे रति और कामदेवके गर्वको हरण करते थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 418 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिबिध बसन उपधान तुराई। छीर फेन मृदु बिसद सुहाई।।
English explanation
Various fabrics, pillows, and mattresses were soft, white, and lovely like milk foam.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध प्रकार के | of various kinds |
| बसन | वस्त्र, बिछावन के कपड़े | fabrics and bed linens |
| उपधान | तकिए | pillows |
| तुराई | गद्दे | mattresses |
| छीर | दूध | milk |
| फेन | फेन, झाग | foam |
| मृदु | कोमल | soft |
| बिसद | उज्ज्वल, स्वच्छ | bright and pure |
| सुहाई | सुंदर, मनोहर | lovely |
2 तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं। निज छबि रति मनोज मदु हरहीं।।
English explanation
There Sita and Rama slept at night; their beauty humbled the pride of Rati and the god of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| सिय | सीता | Sita |
| रामु | राम | Rama |
| सयन | शयन, सोना | sleeping |
| निसि | रात में | at night |
| करहीं | करते थे | used to do |
| निज | अपनी | their own |
| छबि | सुंदरता से | with their beauty |
| रति | कामदेव की पत्नी रति का | of Rati, the love god’s wife |
| मनोज | कामदेव का | of the god of love |
| मदु | अभिमान | pride |
| हरहीं | हर लेते थे | took away; humbled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 418
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 418, 419
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।