अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकर्म, वचन और मनसे होनेवाले जितने पातक एवं उपपातक (बड़े-छोटे पाप) हैं, जिनको कवि लोग कहते हैं; हे विधाता! यदि इस काममें मेरा मत हो, तो हे माता! वे सब पाप मुझे लगें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 482 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।।
ते पातक मोहि होहुँ बिधाता। जौं यहु होइ मोर मत माता।।
स्रोत अभिलेख 2.167 · पुस्तक पृ. 482, 482
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।।
English explanation
Whatever grave and lesser sins arise through deeds, speech, and thought, as poets describe—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो भी | whatever |
| पातक | गंभीर पाप | grave sins |
| उपपातक | गौण अथवा छोटे पाप | lesser sins |
| अहहीं | हैं | exist |
| करम | कर्म से | through deeds |
| बचन | वचन से | through speech |
| मन | मन से | through thought |
| भव | उत्पन्न | arising |
| कबि | कवि | poets |
| कहहीं | कहते हैं | describe |
2 ते पातक मोहि होहुँ बिधाता। जौं यहु होइ मोर मत माता।।
English explanation
O Creator, may those sins fall upon me if, Mother, this had my consent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| पातक | पाप | sins |
| मोहि | मुझे | upon me |
| होहुँ | लगें, प्राप्त हों | may fall |
| बिधाता | हे विधाता | O Creator |
| जौं | यदि | if |
| यहु | यह कार्य | this deed |
| होइ | हो, रहा हो | was |
| मोर | मेरी | my |
| मत | सहमति से | with consent |
| माता | हे माता | O Mother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.167
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 482
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 482, 482
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।