अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।।
मूल पाठ
जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।।
जे अघ तिय बालक बध कीन्हें। मीत महीपति माहुर दीन्हें।।
स्रोत अभिलेख 2.167 · पुस्तक पृ. 482, 482
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो पाप माता-पिता और पुत्रके मारनेसे होते हैं और जो गोशाला और ब्राह्मणोंके नगर जलानेसे होते हैं; जो पाप स्त्री और बालककी हत्या करनेसे होते हैं और जो मित्र और राजाको जहर देनेसे होते हैं—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 482 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।।
English explanation
Whatever sins arise from killing one’s mother, father, or son, or from burning cows, cowsheds, and Brahmins’ homes—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | whatever |
| अघ | पाप | sins |
| मातु | माता को | one’s mother |
| पिता | पिता को | one’s father |
| सुत | पुत्र को | one’s son |
| मारें | मारने से | from killing |
| गाइ | गायों को | cows |
| गोठ | गोशालाओं को | cowsheds |
| महिसुर | ब्राह्मणों के | Brahmins’ |
| पुर | घरों को | homes |
| जारें | जलाने से | from burning |
2 जे अघ तिय बालक बध कीन्हें। मीत महीपति माहुर दीन्हें।।
English explanation
Whatever sins arise from killing a woman or child, or from poisoning a friend or king—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | whatever |
| अघ | पाप | sins |
| तिय | स्त्री का | a woman’s |
| बालक | बालक का | a child’s |
| बध | वध | killing |
| कीन्हें | करने से | from committing |
| मीत | मित्र को | to a friend |
| महीपति | राजा को | to a king |
| माहुर | विष | poison |
| दीन्हें | देने से | from giving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.167
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 482
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 482, 482
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