अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजैसे किसी उत्तम कुलवाली, साधुस्वभावकी, समझदार और मन, वचन, कर्मसे पतिको ही देवता माननेवाली पतिव्रता स्त्रीको भाग्यवश पतिको छोड़कर (पतिसे अलग) रहना पड़े, उस समय उसके हृदयमें जैसे भयानक सन्ताप होता है, वैसे ही मन्त्रीके हृदयमें हो रहा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 464 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।।
रहै करम बस परिहरि नाहू। सचिव हृदयँ तिमि दारुन दाहु।।
स्रोत अभिलेख 2.145 · पुस्तक पृ. 464, 465
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।।
English explanation
AI draft: Just as a virtuous, discerning woman of good family regards her husband as her deity in deed, thought, and speech—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| कुलीन | अच्छे कुल की | of a good family |
| तिय | स्त्री | woman |
| साधु | सदाचारी | virtuous |
| सयानी | समझदार | discerning |
| पतिदेवता | पति को देवता मानने वाली | regarding her husband as her deity |
| करम | कर्म से | in deed |
| मन | मन से | in thought |
| बानी | वाणी से | in speech |
2 रहै करम बस परिहरि नाहू। सचिव हृदयँ तिमि दारुन दाहु।।
English explanation
Yet lives apart from her husband under the power of fate, so a terrible anguish burned in the heart of the minister Sumantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहै | रहती है | lives |
| करम | भाग्य के | of fate |
| बस | वश में | under the power |
| परिहरि | अलग होकर | having parted from |
| नाहू | पति से | her husband |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र के | of the minister Sumantra |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| तिमि | वैसे ही | just so |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दाहु | संताप | burning anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.145
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 464
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 464, 465
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।