अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।।
मूल पाठ
लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।।
सूखहिं अधर लागि मुहँ लाटी। जिउ न जाइ उर अवधि कपाटी।।
स्रोत अभिलेख 2.145 · पुस्तक पृ. 464, 465
भावार्थ
मूल पाठ के बादनेत्रोंमें जल भरा है, दृष्टि मन्द हो गयी है। कानोंसे सुनायी नहीं पड़ता, व्याकुल हुई बुद्धि बेठिकाने हो रही है। ओठ सूख रहे हैं, मुँहमें लाटी लग गयी है। किन्तु [ये सब मृत्युके लक्षण हो जानेपर भी] प्राण नहीं निकलते; क्योंकि हृदयमें अवधिरूपी किवाड़ लगे हैं (अर्थात् चौदह वर्ष बीत जानेपर भगवान् फिर मिलेंगे, यही आशा रुकावट डाल रही है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 464 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।।
English explanation
His eyes were filled with tears and his sight grew dim. His ears could not hear; his mind was distraught and bewildered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोचन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
| डीठि | दृष्टि | sight |
| भइ | हो गई | became |
| थोरी | क्षीण | dim |
| सुनइ | सुनाई देता है | hears |
| न | नहीं | not |
| श्रवन | कान | ears |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मति | बुद्धि | mind |
| भोरी | भ्रमित | bewildered |
2 सूखहिं अधर लागि मुहँ लाटी। जिउ न जाइ उर अवधि कपाटी।।
English explanation
His lips were drying, and thick saliva coated his mouth. His life would not depart: the appointed time of Rama’s return stood like a closed door in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूखहिं | सूख रहे हैं | are drying |
| अधर | होंठ | lips |
| लागि | लग गई | has formed |
| मुहँ | मुँह में | in the mouth |
| लाटी | गाढ़ी लार | thick saliva |
| जिउ | प्राण | life |
| न | नहीं | not |
| जाइ | निकलते | departs |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अवधि | नियत अवधि | the appointed period |
| कपाटी | किवाड़ के समान रोक | a restraining door |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.145
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 464
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 464, 465
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।