अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा।।
मूल पाठ
जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा।।
जिअत राम बिधु बदनु निहारा। राम बिरह करि मरनु सँवारा।।
स्रोत अभिलेख 2.156 · पुस्तक पृ. 473, 473
भावार्थ
मूल पाठ के बादजीने और मरनेका फल तो दशरथजीने ही पाया, जिनका निर्मल यश अनेकों ब्रह्माण्डोंमेंं छा गया। जीते-जी तो श्रीरामचन्द्रजीके चन्द्रमाके समान मुखको देखा और श्रीरामके विरहको निमित्त बनाकर अपना मरण सुधार लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 473 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा।।
English explanation
Dasharatha attained the fulfillment of both life and death; his spotless fame spread across countless universes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिअन | जीने का | of living |
| मरन | मरने का | of dying |
| फलु | फल; सार्थकता | fruit; fulfillment |
| दसरथ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| पावा | पाया | attained |
| अंड | ब्रह्मांडों में | in universes |
| अनेक | अनेक | countless |
| अमल | निर्मल | spotless |
| जसु | यश | fame |
| छावा | छा गया | spread throughout |
2 जिअत राम बिधु बदनु निहारा। राम बिरह करि मरनु सँवारा।।
English explanation
While alive, he beheld Rama’s moonlike face, and through separation from Rama he gave fulfillment to his death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिअत | जीते हुए | while living |
| राम | राम का | Rama’s |
| बिधु | चंद्रमा-समान | moonlike |
| बदनु | मुख | face |
| निहारा | देखा | beheld |
| राम | राम के | from Rama |
| बिरह | विरह | separation |
| करि | के द्वारा | through |
| मरनु | मरण को | his death |
| सँवारा | सार्थक किया | made meaningful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.156
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 473
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।