अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिनकी भक्तिका लवलेश देखकर मुनिगण और मिथिलेश्वर जनकजी प्रेममें मग्र हो गये, उन भरतजीकी महिमा तुलसीदास कैसे कहे? उनकी भक्ति और सुन्दर भावसे [कविके] हृदयमें सुबुद्धि हुलस रही है (विकसित हो रही है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 598 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।।
महिमा तासु कहै किमि तुलसी। भगति सुभायँ सुमति हियँ हुलसी।।
स्रोत अभिलेख 2.303 · पुस्तक पृ. 597, 598
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।।
English explanation
Seeing even a tiny trace of Bharata’s devotion, the sages and Janaka, king of Mithila, became absorbed in love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनकी | whose |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| भगति | भक्ति का | of devotion |
| लवलेसू | अत्यंत थोड़ा अंश | a very tiny trace |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| मुनिगन | मुनियों का समूह | the sages |
| मिथिलेसू | मिथिला के राजा जनक | Janaka, king of Mithila |
2 महिमा तासु कहै किमि तुलसी। भगति सुभायँ सुमति हियँ हुलसी।।
English explanation
How can Tulsidas express Bharata’s greatness? Through devotion’s natural impulse, his discerning mind rejoiced within his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महिमा | महिमा | greatness |
| तासु | उनकी | his |
| कहै | कहें | express |
| किमि | कैसे | how |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| भगति | भक्ति के | of devotion |
| सुभायँ | स्वभाव से | through its natural impulse |
| सुमति | सुबुद्धि | discerning mind |
| हियँ | हृदय में | within the heart |
| हुलसी | उल्लसित हुई | rejoiced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.303
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 598
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 597, 598
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।