अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।।
मूल पाठ
आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।।
कहि न सकति गुन रुचि अधिकाई। मति गति बाल बचन की नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.303 · पुस्तक पृ. 597, 598
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु वह बुद्धि अपनेको छोटी और भरतजीकी महिमाको बड़ी जानकर कविपरम्पराकी मर्यादाको मानकर सकुचा गयी (उसका वर्णन करनेका साहस नहीं कर सकी)। उसकी गुणोंमें रुचि तो बहुत है; पर उन्हें कह नहीं सकती। बुद्धिकी गति बालकके वचनोंकी तरह हो गयी (वह कुण्ठित हो गयी)!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 598 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।।
English explanation
But that mind recognized itself as small and Bharata’s greatness as vast; mindful of the honor of the community of poets, it grew hesitant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | अपने को | itself |
| छोटि | छोटी | small |
| महिमा | भरत की महिमा | Bharata’s greatness |
| बड़ि | बड़ी | vast |
| जानी | जानकर | recognizing |
| कबिकुल | कवि-समुदाय की | of the community of poets |
| कानि | मर्यादा | honor |
| मानि | ध्यान रखकर | taking into account |
| सकुचानी | संकोच में पड़ गई | grew hesitant |
2 कहि न सकति गुन रुचि अधिकाई। मति गति बाल बचन की नाई।।
English explanation
That mind cannot express Bharata’s virtues, though its desire to do so is great; its condition resembles a child’s attempt to speak.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कह | express |
| न | नहीं | not |
| सकति | सकती | can |
| गुन | भरत के गुण | Bharata’s virtues |
| रुचि | कहने की इच्छा | desire to express them |
| अधिकाई | बहुत अधिक | very great |
| मति | बुद्धि की | of the mind |
| गति | दशा | condition |
| बाल | बालक के | a child’s |
| बचन | बोलने | speech |
| की | के | of |
| नाई | समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.303
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 598
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 597, 598
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।