अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।।
मूल पाठ
रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।।
भरत प्रीति नति बिनय बड़ाई। सुनत सुखद बरनत कठिनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.303 · पुस्तक पृ. 597, 598
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लोग चित्रलिखे-से श्रीरामचन्द्रजीकी ओर देख रहे हैं। सकुचाते हुए सिखाये हुए-से वचन बोलते हैं। भरतजीकी प्रीति, नम्रता, विनय और बड़ाई सुननेमें सुख देनेवाली है, पर उसके वर्णन करनेमें कठिनता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 597 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।।
English explanation
They gazed at Rama as though they were figures in a painting; with hesitation, they spoke words as if these had been taught to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | at Rama |
| चितवत | देखते हुए | gazing |
| चित्र | चित्र में | in a painting |
| लिखे | अंकित | depicted |
| से | जैसे | as though |
| सकुचत | संकोच करते हुए | hesitating |
| बोलत | बोलते हुए | speaking |
| बचन | वचन | words |
| सिखे | सिखाए हुए | taught |
| से | जैसे | as if |
2 भरत प्रीति नति बिनय बड़ाई। सुनत सुखद बरनत कठिनाई।।
English explanation
Bharata’s love, humility, respectful entreaty, and greatness are delightful to hear of, but difficult to describe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| प्रीति | प्रेम | love |
| नति | नम्रता | humility |
| बिनय | विनयपूर्ण प्रार्थना | respectful entreaty |
| बड़ाई | महानता | greatness |
| सुनत | सुनने में | to hear of |
| सुखद | सुख देने वाला | delightful |
| बरनत | वर्णन करने में | to describe |
| कठिनाई | कठिनाई | difficulty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.303
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 597
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 597, 598
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।