अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहमारा स्वभाव तो जलाने ही योग्य है। क्योंकि तुम्हारा अहित मुझसे देखा नहीं जाता। इसीलिये कुछ बात चलायी थी। किन्तु हे देवि! हमारी बड़ी भूल हुई, क्षमा करो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 357 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा।।
तातें कछुक बात अनुसारी। छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी।।
स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 356, 357
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा।।
English explanation
My nature deserves to be burned away: I cannot bear to see harm befall you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जारै | जलाने के | to be burned |
| जोगु | योग्य | deserving |
| सुभाउ | स्वभाव | nature; disposition |
| हमारा | मेरा | my |
| अनभल | अहित | harm; misfortune |
| देखि | देखा | seen; borne to witness |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| तुम्हारा | तुम्हारा | your |
2 तातें कछुक बात अनुसारी। छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी।।
English explanation
That is why I brought up a few things. Forgive me, lady; mine was a grave mistake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तातें | इसी कारण | therefore |
| कछुक | कुछ | a little; some |
| बात | बात | matter; words |
| अनुसारी | उठाई; कही | brought up; spoke |
| छमिअ | क्षमा कीजिए | please forgive |
| देबि | हे देवी | O lady |
| बड़ि | बड़ी | great; grave |
| चूक | भूल | mistake |
| हमारी | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 357
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 356, 357
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।