अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।
मूल पाठ
जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।
मुदित नारि नर देखहिं सोभा। रूप अनूप नयन मनु लोभा।।
स्रोत अभिलेख 2.115 · पुस्तक पृ. 439, 439
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनमें सीताजीको थकी हुई जानकर घड़ीभर बड़की छायामें विश्राम किया। स्त्री-पुरुष आनन्दित होकर शोभा देखते हैं। अनुपम रूपने उनके नेत्र और मनोंको लुभा लिया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 439 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।
English explanation
Recognizing inwardly that Sita was tired, Rama paused briefly in the shade of a banyan tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानी | जानकर | having recognized |
| श्रमित | थकी हुई | weary |
| सीय | सीता को | Sita, Rama’s wife |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| घरिक | थोड़ी देर | a short while |
| बिलंबु | ठहराव | a pause |
| कीन्ह | किया | made |
| बट | बरगद की | of a banyan tree |
| छाहीं | छाया में | in the shade |
2 मुदित नारि नर देखहिं सोभा। रूप अनूप नयन मनु लोभा।।
English explanation
Delighted women and men behold their beauty; that matchless appearance captivates their eyes and minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| देखहिं | देखते हैं | behold |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| रूप | रूप | appearance; beauty |
| अनूप | अनुपम | matchless |
| नयन | नेत्रों को | the eyes |
| मनु | मन को | the mind |
| लोभा | आकर्षित करता है | captivates |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 439
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 439, 439
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।