अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।।
मूल पाठ
जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।।
निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।।
स्रोत अभिलेख 2.196 · पुस्तक पृ. 505, 506
भावार्थ
मूल पाठ के बादरानियाँ उसे लक्ष्मणजीके समान समझकर आशीर्वाद देती हैं कि तुम सौ लाख वर्षोंतक सुखपूर्वक जिओ। नगरके स्त्री-पुरुष निषादको देखकर ऐसे सुखी हुए, मानो लक्ष्मणजीको देख रहे हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 506 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।।
English explanation
Regarding him as equal to Lakshmana, the queens bless him: live happily for ten million years.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | मानकर | regarding him |
| लखन | लक्ष्मण के | Lakshmana, Rama's younger brother |
| सम | समान | equal to |
| देहिं | देती हैं | they give |
| असीसा | आशीर्वाद | blessings |
| जिअहु | तुम जियो | may you live |
| सुखी | सुखी होकर | happily |
| सय | सौ | a hundred |
| लाख | लाख | hundred thousand |
| बरीसा | वर्ष | years |
2 निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।।
English explanation
Seeing the Nishada, the city's men and women rejoiced as though they had seen Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | having seen |
| निषादु | निषादराज गुह को | Guha, the Nishada chief |
| नगर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| भए | हो गए | became |
| सुखी | प्रसन्न | happy |
| जनु | मानो | as though |
| लखनु | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| निहारी | देखा हो | having beheld |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.196
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 506
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 506
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