अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।।
मूल पाठ
कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।।
सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।
स्रोत अभिलेख 2.196 · पुस्तक पृ. 505, 506
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब कहते हैं कि जीवनका लाभ तो इसीने पाया है, जिसे कल्याणस्वरूप श्रीरामचन्द्रजीने भुजाओंमें बाँधकर गले लगाया है। निषाद अपने भाग्यकी बड़ाई सुनकर मनमें परम आनन्दित हो सबको अपने साथ लिवा ले चला॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 506 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।।
English explanation
They say: he has gained life's true reward; he met noble Rama in a full embrace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | वे कहते हैं | they say |
| लहेउ | पा लिया | has gained |
| एहिं | इसने | this man; he |
| जीवन | जीवन का | of life |
| लाहू | लाभ; सार्थक फल | reward; fulfillment |
| भेंटेउ | आलिंगन करके मिला | met in an embrace |
| रामभद्र | श्रीराम से | with noble Rama |
| भरि | भरकर | fully; filling |
| बाहू | बाँहें | arms |
2 सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।
English explanation
Hearing his good fortune praised, the Nishada joyfully set out, taking them along to arrange their lodging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| निषादु | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| निज | अपने | his own |
| भाग | भाग्य की | of good fortune |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| प्रमुदित | अत्यंत प्रसन्न | delighted |
| मन | मन से | at heart |
| लइ | साथ लेकर | taking them along |
| चलेउ | चल पड़ा | set out |
| लेवाई | ठहराने के लिए | to lodge them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.196
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 506
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 506
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।