अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।।
मूल पाठ
जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।।
कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ।
स्रोत अभिलेख 2.283 · पुस्तक पृ. 580, 580
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं भरतको सदा कुलका दीपक जानती हूँ। महाराजने भी बार-बार मुझे यही कहा था। सोना कसौटीपर कसे जानेपर और रत्न पारखी (जौहरी) के मिलनेपर ही पहचाना जाता है। वैसे ही पुरुषकी परीक्षा समय पडऩेपर उसके स्वभावसे ही (उसका चरित्र देखकर) हो जाती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 580 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।।
English explanation
I have always known Bharata to be the light of the family; the king repeatedly told me this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानउँ | मैं जानती हूँ | I know |
| सदा | सदा से | always |
| भरत | भरत; राम के भाई | Bharata, Rama's brother |
| कुलदीपा | कुल के दीपक; वंश की शोभा | the family's light and glory |
| बार | बार | time |
| बार | बार; पुनः | after time; again |
| मोहि | मुझसे | to me |
| कहेउ | कहा था | had said |
| महीपा | महाराज दशरथ ने | King Dasharatha |
2 कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ।
English explanation
Gold is tested on a touchstone, and a gem when an expert examines it; people are tested by the character they reveal when the occasion arises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कसें | कसौटी पर कसने से | by testing on a touchstone |
| कनकु | सोना | gold |
| मनि | मणि; रत्न | a gem |
| पारिखि | पारखी; रत्न का जानकार | an expert appraiser |
| पाएँ | मिलने पर | upon finding one |
| पुरुष | मनुष्य | people |
| परिखिअहिं | परखे जाते हैं | are tested |
| समयँ | समय आने पर | when the occasion arises |
| सुभाएँ | अपने स्वभाव से | by their character |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 580
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 580
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।