अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।।
मूल पाठ
भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।।
कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।।
स्रोत अभिलेख 2.283 · पुस्तक पृ. 580, 580
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतके शील, गुण, नम्रता, बड़प्पन, भाईपन, भक्ति, भरोसे और अच्छेपनका वर्णन करनेमें सरस्वतीजीकी बुद्धि भी हिचकती है। सीपसे कहीं समुद्र उलीचे जा सकते हैं?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 580 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।।
English explanation
Bharata's good character, virtues, humility, greatness, brotherly affection, devotion, trustworthiness, and goodness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का; राम के भाई | of Bharata, Rama's brother |
| सील | सदाचार | good character |
| गुन | गुण | virtues |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| बड़ाई | बड़प्पन | greatness |
| भायप | भाईचारे का प्रेम | brotherly affection |
| भगति | भक्ति | devotion |
| भरोस | विश्वसनीयता | trustworthiness |
| भलाई | भलाई | goodness |
2 कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।।
English explanation
Even Saraswati's intellect falls short when describing these; can oceans be emptied with shells?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | वर्णन करते हुए | while describing |
| सारदहु | सरस्वती की भी; वाणी की देवी | even of Saraswati, goddess of speech |
| कर | की | of |
| मति | बुद्धि | intellect |
| हीचे | कम पड़ जाती है | falls short |
| सागर | समुद्र | oceans |
| सीप | सीपों से | with shells |
| कि | क्या | can; questioning particle |
| जाहिं | जा सकते हैं | can be |
| उलीचे | उलीचे; जल निकालकर खाली किए | emptied by bailing out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 580
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 580
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