अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दईश्वरके अनुग्रह और आपके आशीर्वादसे मेरे [चारों] पुत्र और [चारों] बहुएँ गङ्गाजीके जलके समान पवित्र हैं। हे सखी! मैंने कभी श्रीरामकी सौगन्ध नहीं की, सो आज श्रीरामकी शपथ करके सत्य भावसे कहती हूँ—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 580 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।।
राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.283 · पुस्तक पृ. 580, 580
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।।
English explanation
By God's grace and your blessings, my sons and daughters-in-law are as pure as the water of the Ganges. (This interpretation is an AI draft.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ईस | ईश्वर की | God's |
| प्रसाद | कृपा से | by grace |
| असीस | आशीर्वाद से | through blessings |
| तुम्हारी | तुम्हारे | your |
| सुत | पुत्र | sons |
| सुतबधू | पुत्रवधुएँ | daughters-in-law |
| देवसरि | देवनदी गंगा का | of the divine river Ganges |
| बारी | जल; यहाँ उसके समान पवित्र | water; here, equally pure |
2 राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।।
English explanation
I have never sworn by Rama; now, taking that oath, dear friend, I speak with sincere feeling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | by Rama |
| सपथ | शपथ | an oath |
| मैं | मैंने | I |
| कीन्ह | ली है | have taken |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
| सो | वही शपथ | that very oath |
| करि | लेकर | taking |
| कहउँ | मैं कहती हूँ | I say |
| सखी | हे सखी | dear friend |
| सति | सच्चे | sincere |
| भाऊ | भाव से | with feeling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 580
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 580, 580
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।