अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू।।
मूल पाठ
जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू।।
रथ कर खोज कतहहुँ नहिं पावहिं। राम राम कहि चहु दिसि धावहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.86 · पुस्तक पृ. 414, 415
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबेरा होते ही सब लोग जागे, तो बड़ा शोर मचा कि श्रीरघुनाथजी चले गये। कहीं रथका खोज नहीं पाते, सब 'हा राम! हा राम! पुकारते हुए चारों ओर दौड़ रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 414 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू।।
English explanation
AI-draft interpretation: At dawn everyone awoke. Rama had gone, and a great outcry arose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागे | जाग उठे | awoke |
| सकल | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
| भएँ | होने पर | upon its becoming |
| भोरू | भोर | dawn |
| गे | चले गए | had gone |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| भयउ | हुआ | arose |
| अति | बहुत | great |
| सोरू | कोलाहल | outcry |
2 रथ कर खोज कतहहुँ नहिं पावहिं। राम राम कहि चहु दिसि धावहिं।।
English explanation
They find no trace of the chariot anywhere and run in all four directions crying, “Rama, Rama!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथ | रथ | chariot |
| कर | का | of |
| खोज | पदचिह्न या निशान | track or trace |
| कतहहुँ | कहीं भी | anywhere |
| नहिं | नहीं | not |
| पावहिं | पाते हैं | they find |
| राम | राम—पुकार में नाम | Rama, called out by name |
| राम | राम—दोबारा पुकार | Rama, the repeated cry |
| कहि | कहते हुए | saying |
| चहु | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | in directions |
| धावहिं | दौड़ते हैं | they run |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 414
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 414, 415
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।