अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।।
मूल पाठ
जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।।
मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू।।
स्रोत अभिलेख 2.178 · पुस्तक पृ. 491, 491
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे आज्ञा दीजिये, मैं श्रीरामजीके पास जाऊँ! एक ही आँक (निश्चयपूर्वक) मेरा हित इसीमें है। और मुझे राजा बनाकर आप अपना भला चाहते हैं, यह भी आप स्नेहकी जड़ता (मोह) के वश होकर ही कह रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 491 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।।
English explanation
Give me permission to go to Rama; this alone is certainly for my good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाउँ | मैं जाऊँ | let me go |
| राम | राम | Rama |
| पहिं | के पास | to; near |
| आयसु | आज्ञा; अनुमति | permission |
| देहू | दीजिए | please give |
| एकहिं | एक ही; केवल | one alone; only |
| आँक | निश्चय; निश्चित निर्णय | certainty; settled conclusion |
| मोर | मेरा | my |
| हित | हित | good; welfare |
| एहू | यही | this very thing |
2 मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू।।
English explanation
You seek your own good by making me king; even this you say under the sway of affection and unthinking judgment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | me |
| नृप | राजा | king |
| करि | बनाकर | having made |
| भल | भलाई; कल्याण | good; welfare |
| आपन | अपना | your own |
| चहहू | आप चाहते हैं | you desire |
| सोउ | वह भी | even that |
| सनेह | स्नेह | affection |
| जड़ता | अविवेक; समझ की जड़ता | unthinking judgment; lack of discernment |
| बस | के वश में | under the sway of |
| कहहू | आप कहते हैं | you say |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.178
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 491
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 491, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।