अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।।
मूल पाठ
सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।।
जायँ जीव बिनु देह सुहाई। बादि मोर सबु बिनु रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.178 · पुस्तक पृ. 491, 491
भावार्थ
मूल पाठ के बादरोगी शरीरके लिये नाना प्रकारके भोग व्यर्थ हैं। श्रीहरिकी भक्तिके बिना जप और योग व्यर्थ हैं। जीवके बिना सुन्दर देह व्यर्थ है। वैसे ही श्रीरघुनाथजीके बिना मेरा सब कुछ व्यर्थ है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 491 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।।
English explanation
Many enjoyments are useless for an ailing body; without devotion to Hari, recitation and yoga are fruitless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरुज | रोगयुक्त | afflicted with illness |
| सरीर | शरीर | body |
| बादि | व्यर्थ | useless |
| बहु | अनेक; बहुत | many |
| भोगा | भोग; सुख-साधन | enjoyments |
| बिनु | बिना | without |
| हरिभगति | भगवान हरि की भक्ति | devotion to Hari, the Lord |
| जायँ | व्यर्थ | fruitless |
| जप | मंत्र या नाम का जप | repetition of a mantra or divine name |
| जोगा | योग-साधना | yogic practice |
2 जायँ जीव बिनु देह सुहाई। बादि मोर सबु बिनु रघुराई।।
English explanation
A beautiful body is useless without its living soul; likewise, everything of mine is useless without Rama, lord of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जायँ | व्यर्थ | useless |
| जीव | जीव; प्राणधारी आत्मा | living soul |
| बिनु | बिना | without |
| देह | देह; शरीर | body |
| सुहाई | सुंदर | beautiful |
| बादि | व्यर्थ | useless |
| मोर | मेरा | my |
| सबु | सब कुछ | everything |
| बिनु | बिना | without |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.178
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 491
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 491, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।