अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।।
मूल पाठ
सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।।
बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्म बिचारू।।
स्रोत अभिलेख 2.178 · पुस्तक पृ. 491, 491
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह शोकका समुदाय राज्य लक्ष्मण, श्रीरामचन्द्रजी और सीताजीके चरणोंको देखे बिना किस गिनतीमें है (इसका क्या मूल्य है)? जैसे कपड़ोंके बिना गहनोंका बोझ व्यर्थ है। वैराग्यके बिना ब्रह्मविचार व्यर्थ है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 491 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।।
English explanation
Without seeing the feet of Lakshmana, Rama, and Sita, what worth has this kingdom, a heap of sorrow?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक का | of sorrow |
| समाजु | समूह; ढेर | mass; heap |
| राजु | राज्य | kingdom |
| केहि | किस | what |
| लेखें | गिनती में; मूल्य का | account; worth |
| लखन | लक्ष्मण के | of Lakshmana, Rama’s brother |
| राम | राम के | of Rama |
| सिय | सीता के | of Sita |
| बिनु | बिना | without |
| पद | चरण | feet |
| देखें | देखे | seeing |
2 बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्म बिचारू।।
English explanation
Heavy ornaments are useless without clothing, and contemplation of Brahman is useless without detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बादि | व्यर्थ | useless |
| बसन | वस्त्रों | clothing |
| बिनु | बिना | without |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| भारू | भारी | heavy |
| बादि | व्यर्थ | fruitless |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिनु | बिना | without |
| ब्रह्म | ब्रह्म का | of Brahman, ultimate reality |
| बिचारू | विचार; चिंतन | reflection; contemplation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.178
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 491
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 491, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।