अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।।
मूल पाठ
जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।।
भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू।।
स्रोत अभिलेख 2.198 · पुस्तक पृ. 507, 508
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ सीताजी, श्रीरामजी और लक्ष्मण रातको सोये थे। ऐसा कहते ही उनके नेत्रोंके कोयोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल भर आया। भरतजीके वचन सुनकर निषादको बड़ा विषाद हुआ। वह तुरंत ही उन्हें वहाँ ले गया—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 508 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।।
English explanation
AI draft interpretation: ‘Where Sita, Rama, and Lakshmana slept at night.’ As Bharata said this, the corners of his eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| रामु | राम | Rama |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| निसि | रात में | at night |
| सोए | सोए थे | slept |
| कहत | कहते हुए | while saying this |
| भरे | भर गए | filled |
| जल | आँसुओं से | with tears |
| लोचन | आँखों के | of the eyes |
| कोए | कोने | corners |
2 भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू।।
English explanation
AI draft interpretation: Hearing Bharata’s words, the Nishada chief felt sorrow and immediately took him there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भयउ | हुआ | arose |
| बिषादू | दुख | sorrow |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| तहाँ | वहाँ | there |
| लइ | लेकर | taking him |
| गयउ | गए | went |
| निषादू | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 508
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 507, 508
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।