अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसखा निषादराजके हाथसे हाथ मिलाये हुए भरतजी चले। प्रेम कुछ थोड़ा नहीं है (अर्थात् बहुत अधिक प्रेम है), जिससे उनका शरीर शिथिल हो रहा है। भरतजी सखासे पूछते हैं कि मुझे वह स्थान दिखलाओ—और नेत्र और मनकी जलन कुछ ठंडी करो—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 507 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।।
पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ। नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.198 · पुस्तक पृ. 507, 508
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।।
English explanation
AI draft interpretation: Bharata walked holding his friend’s hand in his own; his body was weakened by overwhelming affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले | walked |
| सखा | मित्र के | his friend’s |
| कर | हाथ | hand |
| सों | से | with |
| कर | अपना हाथ | his own hand |
| जोरें | जोड़कर; थामकर | joined; holding |
| सिथिल | शिथिल | limp; weakened |
| सरीर | शरीर | body |
| सनेह | स्नेह से | from affection |
| न | नहीं | not |
| थोरें | थोड़े | slight |
2 पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ। नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ।।
English explanation
AI draft interpretation: Bharata asks his friend, ‘Show me that place, so that I may somewhat soothe the burning in my eyes and mind.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछत | पूछते हैं | asks |
| सखहि | मित्र से | his friend |
| सो | वह | that |
| ठाउँ | स्थान | place |
| देखाऊ | दिखाओ | show me |
| नेकु | थोड़ा | a little |
| नयन | आँखों की | of the eyes |
| मन | मन की | of the mind |
| जरनि | जलन; संताप | burning anguish |
| जुड़ाऊ | शांत करूँ | may I soothe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 507
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 507, 508
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।