अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।।
मूल पाठ
चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।।
भाइहि सौंपि मातु सेवकाई। आपु निषादहि लीन्ह बोलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.198 · पुस्तक पृ. 507, 508
भावार्थ
मूल पाठ के बादचरण दबाकर और कोमल वचन कह-कहकर भरतजीने सब माताओंका सत्कार किया। फिर भाई शत्रुघ्नको माताओंकी सेवा सौंपकर आपने निषादको बुला लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 507 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।।
English explanation
AI draft interpretation: Bharata honored all the mothers by massaging their feet and repeatedly speaking gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरणों को | feet |
| चाँपि | दबाकर | having massaged |
| कहि | कहकर | speaking |
| कहि | बार-बार कहकर | repeatedly speaking |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी; वचन | words |
| जननीं | माताओं को | the mothers |
| सकल | सभी | all |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| सनमानी | सम्मान दिया | honored |
2 भाइहि सौंपि मातु सेवकाई। आपु निषादहि लीन्ह बोलाई।।
English explanation
AI draft interpretation: Entrusting the care of the mothers to his brother, Bharata himself summoned the Nishada chief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाइहि | भाई को | to his brother |
| सौंपि | सौंपकर | having entrusted |
| मातु | माताओं की | of the mothers |
| सेवकाई | सेवा | care and service |
| आपु | स्वयं | himself |
| निषादहि | निषादराज गुह को | Guha, the Nishada chief |
| लीन्ह | लिया | completed the action |
| बोलाई | बुला | called for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 507
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 507, 508
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।