अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।।
मूल पाठ
जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।।
सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.198 · पुस्तक पृ. 507, 508
भावार्थ
मूल पाठ के बादलोगोंने जहाँ-तहाँ डेरा डाल दिया। भरतजीने सभीका पता लगाया [कि सब लोग आकर आरामसे टिक गये हैं या नहीं]। फिर देवपूजन करके आज्ञा पाकर दोनों भाई श्रीरामचन्द्रजीकी माता कौसल्याजीके पास गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 507 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।।
English explanation
AI draft interpretation: The people made camp at various places. Bharata checked on everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | वहाँ | there |
| लोगन्ह | लोगों ने | the people |
| डेरा | पड़ाव | camp |
| कीन्हा | डाला | set up |
| भरत | भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| सोधु | सुध; कुशल-क्षेम की खबर | news of well-being |
| सबही | सभी की | everyone’s |
| कर | की | of |
| लीन्हा | ले ली | obtained |
2 सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई।।
English explanation
AI draft interpretation: The opening ‘सुर’ is uncertain; if ‘गुर’ is intended, the two brothers served their preceptor and, after obtaining permission, went to Rama’s mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | deities |
| सेवा | सेवा | service |
| करि | करके | having performed |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | पाकर | having obtained |
| राम | राम की | Rama’s |
| मातु | माता | mother |
| पहिं | के पास | to |
| गे | गए | went |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 507
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 507, 508
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।