अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ ह्रदउ न गयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअरी कुमति! जब तूने हृदयमें यह बुरा विचार (निश्चय) ठाना, उसी समय तेरे हृदयके टुकड़े- टुकड़े [क्यों] न हो गये? वरदान माँगते समय तेरे मनमें कुछ भी पीड़ा नहीं हुई? तेरी जीभ गल नहीं गयी? तेरे मुँहमें कीड़े नहीं पड़ गये?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 478 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ ह्रदउ न गयऊ।।
बर मागत मन भइ नहिं पीरा। गरि न जीह मुहँ परेउ न कीरा।।
स्रोत अभिलेख 2.162 · पुस्तक पृ. 478, 478
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ ह्रदउ न गयऊ।।
English explanation
When you, foolish woman, resolved upon this evil thought in your heart, why did your heart not break into pieces?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तैं | तूने | you |
| कुमति | हे दुर्बुद्धि स्त्री | O foolish woman |
| कुमत | बुरा विचार | evil thought |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| ठयऊ | ठान लिया | resolved upon |
| खंड | टुकड़ा | piece |
| खंड | टुकड़ा | piece |
| होइ | होकर | having become |
| ह्रदउ | हृदय | heart |
| न | नहीं | not |
| गयऊ | हो गया | become |
2 बर मागत मन भइ नहिं पीरा। गरि न जीह मुहँ परेउ न कीरा।।
English explanation
While asking for the boons, why did you feel no pain in your heart? Why did your tongue not rot away, and why did no worm fall into your mouth?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बर | वरदान | boons |
| मागत | माँगते समय | while asking for |
| मन | मन में | in your heart |
| भइ | हुई | arose |
| नहिं | नहीं | not |
| पीरा | पीड़ा | pain |
| गरि | गल गई | rotted away |
| न | नहीं | not |
| जीह | जीभ | tongue |
| मुहँ | मुँह में | into your mouth |
| परेउ | पड़ा | fell |
| न | नहीं | not |
| कीरा | कीड़ा | worm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 478
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 478
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।