अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूपँ प्रतीत तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने तेरा विश्वास कैसे कर लिया? [जान पड़ता है,] विधाताने मरनेके समय उनकी बुद्धि हर ली थी। स्त्रियोंके हृदयकी गति (चाल) विधाता भी नहीं जान सके । वह सम्पूर्ण कपट, पाप और अवगुणोंकी खान है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 478 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भूपँ प्रतीत तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही।।
बिधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी।।
स्रोत अभिलेख 2.162 · पुस्तक पृ. 478, 478
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भूपँ प्रतीत तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही।।
English explanation
How did the king come to trust you? At the time of death, the Creator had taken away his judgment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपँ | राजा ने | the king |
| प्रतीत | विश्वास | trust |
| तोरि | तुझ पर | in you |
| किमि | कैसे | how |
| कीन्ही | किया | placed |
| मरन | मृत्यु का | of death |
| काल | समय | time |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| मति | बुद्धि | judgment |
| हरि | हरकर | taking away |
| लीन्ही | ले ली | took |
2 बिधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी।।
English explanation
Even the Creator could not fathom a woman's heart—a mine of every deceit, sin, and vice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधिहुँ | विधाता भी | even the Creator |
| न | नहीं | not |
| नारि | स्त्री के | a woman's |
| हृदय | हृदय की | of the heart |
| गति | भीतरी दशा | inner workings |
| जानी | जानी | understood |
| सकल | समस्त | all |
| कपट | छल | deceit |
| अघ | पाप | sin |
| अवगुन | दोष | vices |
| खानी | खान | mine |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 478
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 478
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।