अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरल सुसील धरम रत राऊ। सो किमि जानै तीय सुभाऊ।।
मूल पाठ
सरल सुसील धरम रत राऊ। सो किमि जानै तीय सुभाऊ।।
अस को जीव जंतु जग माहीं। जेहि रघुनाथ प्रानप्रिय नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.162 · पुस्तक पृ. 478, 478
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर राजा तो सीधे, सुशील और धर्मपरायण थे। वे भला, स्त्री-स्वभावको कैसे जानते? अरे, जगत्के जीव-जन्तुओंमें ऐसा कौन है जिसे श्रीरघुनाथजी प्राणोंके समान प्यारे नहीं हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 478 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सरल सुसील धरम रत राऊ। सो किमि जानै तीय सुभाऊ।।
English explanation
The king was straightforward, virtuous, and devoted to righteousness; how could he understand a woman's nature?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरल | निष्कपट | straightforward |
| सुसील | अच्छे आचरण वाले | virtuous |
| धरम | धर्म में | to righteousness |
| रत | अनुरक्त | devoted |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सो | वे | he |
| किमि | कैसे | how |
| जानै | जान सकते | could know |
| तीय | स्त्री का | a woman's |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
2 अस को जीव जंतु जग माहीं। जेहि रघुनाथ प्रानप्रिय नाहीं।।
English explanation
What creature in this world does not love Rama as dearly as life itself?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| को | कौन | who |
| जीव | जीव | living being |
| जंतु | प्राणी | creature |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| जेहि | जिसे | to whom |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's lineage |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | dear as life itself |
| नाहीं | नहीं हैं | are not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 478
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 478
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।