अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे श्रीरामजी भी तुझे अहित हो गये (वैरी लगे)! तू कौन है? मुझे सच-सच कह! तू जो है, सो है, अब मुँहमें स्याही पोतकर (मुँह काला करके) उठकर मेरी आँखोंकी ओटमें जा बैठ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 478 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही।।
जो हसि सो हसि मुहँ मसि लाई। आँखि ओट उठि बैठहिं जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.162 · पुस्तक पृ. 478, 478
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही।।
English explanation
Even Rama seemed utterly harmful to you! Who are you? Tell me the truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भे | हुए | became |
| अति | अत्यंत | extremely |
| अहित | अहितकारी | harmful |
| रामु | राम | Rama |
| तेउ | वे भी | even he |
| तोही | तेरे लिए | to you |
| को | कौन | who |
| तू | तू | you |
| अहसि | है | are |
| सत्य | सच | the truth |
| कहु | बता | tell |
| मोही | मुझे | me |
2 जो हसि सो हसि मुहँ मसि लाई। आँखि ओट उठि बैठहिं जाई।।
English explanation
Whatever you are, so be it; blacken your face, get up, and go sit out of my sight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो भी | whatever |
| हसि | तू है | you are |
| सो | वही | that |
| हसि | तू है | you are |
| मुहँ | मुँह पर | on your face |
| मसि | कालिख | soot |
| लाई | लगाकर | having applied |
| आँखि | आँखों की | of sight |
| ओट | ओट में | out of view |
| उठि | उठकर | getting up |
| बैठहिं | बैठ जा | sit |
| जाई | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 478
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 478
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।