अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।।
मूल पाठ
जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।।
बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे।।
स्रोत अभिलेख 2.251 · पुस्तक पृ. 552, 553
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे प्रभुके चरणकमल देखे, तबसे हमारे दु:सह दु:ख और दोष मिट गये। वनवासियोंके वचन सुनकर अयोध्याके लोग प्रेममें भर गये और उनके भाग्यकी सराहना करने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 553 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।।
English explanation
Ever since we beheld the Lord’s lotus-like feet, our unbearable sorrows and faults have vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तें | से | since |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल जैसे | lotus-like |
| निहारे | देखे | beheld |
| मिटे | मिट गए | vanished |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| दुख | दुःख | sorrows |
| दोष | दोष | faults |
| हमारे | हमारे | our |
2 बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे।।
English explanation
Hearing their words, the townspeople were filled with affection and began praising the forest dwellers’ good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| अनुरागे | प्रेम से भर गए | were filled with affection |
| तिन्ह | उन वनवासियों | those forest dwellers |
| के | के | of |
| भाग | सौभाग्य | good fortune |
| सराहन | प्रशंसा करने | to praise |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 553
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 552, 553
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।