अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
लागे सराहन भाग सब अनुराग बचन सुनावहीं।
मूल पाठ
लागे सराहन भाग सब अनुराग बचन सुनावहीं।
बोलनि मिलनि सिय राम चरन सनेहु लखि सुखु पावहीं॥
नर नारि निदरहिं नेहु निज सुनि कोल भिल्लनि की गिरा।
तुलसी कृपा रघुबंसमनि की लोह लै लौका तिरा॥
स्रोत अभिलेख 2.251 · पुस्तक पृ. 552, 553
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब उनके भाग्यकी सराहना करने लगे और प्रेमके वचन सुनाने लगे। उन लोगोंके बोलने और मिलनेका ढंग तथा श्रीसीतारामजीके चरणोंमें उनका प्रेम देखकर सब सुख पा रहे हैं। उन कोल-भीलोंकी वाणी सुनकर सभी नर-नारी अपने प्रेमका निरादर करते हैं (उसे धिक्कार देते हैं)। तुलसीदासजी कहते हैं कि यह रघुवंशमणि श्रीरामचन्द्रजीकी कृपा है कि लोहा नौकाको अपने ऊपर लेकर तैर गया।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 553 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1लागे सराहन भाग सब अनुराग बचन सुनावहीं।
English explanation
AI-generated draft: Everyone began praising their good fortune and speaking affectionate words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागे | लगे; आरंभ किया | began to |
| सराहन | सराहना करने | praise |
| भाग | सौभाग्य | good fortune |
| सब | सभी लोग | everyone |
| अनुराग | प्रेम से भरे | affectionate; filled with love |
| बचन | वचन; बातें | words; remarks |
| सुनावहीं | सुनाते हैं | speak for others to hear |
2बोलनि मिलनि सिय राम चरन सनेहु लखि सुखु पावहीं॥
English explanation
Seeing their manner of speaking and meeting others, and their love for Sita and Rama’s feet, everyone feels joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलनि | बोलने का ढंग | manner of speaking |
| मिलनि | मिलने का ढंग | manner of meeting others |
| सिय | सीता के | of Sita |
| राम | राम के | of Rama |
| चरन | चरणों में | toward their feet |
| सनेहु | प्रेम | love; devotion |
| लखि | देखकर; पहचानकर | seeing; recognizing |
| सुखु | सुख; आनंद | joy |
| पावहीं | पाते हैं | experience; obtain |
3नर नारि निदरहिं नेहु निज सुनि कोल भिल्लनि की गिरा।
English explanation
Hearing the words of the Kol and Bhil communities, the men and women regard their own love as insignificant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| निदरहिं | तुच्छ मानते हैं | hold in low esteem |
| नेहु | प्रेम | love; devotion |
| निज | अपना | their own |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कोल | कोल समुदाय | the Kol community |
| भिल्लनि | भील समुदाय के लोगों | members of the Bhil community |
| की | की | of |
| गिरा | वाणी; बातें | speech; words |
4तुलसी कृपा रघुबंसमनि की लोह लै लौका तिरा॥
English explanation
Tulsidas says: By the grace of Rama, the jewel of Raghu’s lineage, a gourd floated across carrying iron with it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| कृपा | कृपा से | through grace |
| रघुबंसमनि | रघुवंश के मणि राम | Rama, jewel of Raghu’s lineage |
| की | की | of |
| लोह | लोहा | iron |
| लै | साथ लेकर | taking along; carrying |
| लौका | लौकी; तैर सकने वाला सूखा तुम्बा | a gourd; a buoyant dried gourd |
| तिरा | तैर गई; पार हुई | floated across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 553
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 552, 553
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।