अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जबहिं जाम जुग जामिनि बीती। राम सचिव सन कहेउ सप्रीती।।
मूल पाठ
जबहिं जाम जुग जामिनि बीती। राम सचिव सन कहेउ सप्रीती।।
खोज मारि रथु हाँकहु ताता। आन उपायँ बनिहि नहिं बाता।।
स्रोत अभिलेख 2.85 · पुस्तक पृ. 413, 414
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब दो पहर रात बीत गयी, तब श्रीरामचन्द्रजीने प्रेमपूर्वक मन्त्री सुमन्त्रसे कहा—हे तात! रथके खोज मारकर (अर्थात् पहियोंके चिह्नोंसे दिशाका पता न चले इस प्रकार) रथको हाँकिये। और किसी उपायसे बात नहीं बनेगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 414 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जबहिं जाम जुग जामिनि बीती। राम सचिव सन कहेउ सप्रीती।।
English explanation
When two watches of the night had passed, Rama spoke affectionately to the minister Sumantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जबहिं | जब ही | when |
| जाम | पहर | watches of time |
| जुग | दो; एक जोड़ी | two; a pair |
| जामिनि | रात | of the night |
| बीती | बीत गई | had passed |
| राम | राम ने | Rama |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सन | से | to |
| कहेउ | कहा | said |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | affectionately |
2 खोज मारि रथु हाँकहु ताता। आन उपायँ बनिहि नहिं बाता।।
English explanation
Dear elder, drive the chariot while obscuring its tracks; no other means will accomplish the purpose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खोज | रास्ते के निशान | tracks; trail |
| मारि | मिटाकर; छिपाकर | erasing; obscuring |
| रथु | रथ | the chariot |
| हाँकहु | चलाइए | drive |
| ताता | हे तात; आदरणीय बड़े | dear elder |
| आन | अन्य | other |
| उपायँ | उपाय से | by a means |
| बनिहि | बनेगी; सफल होगी | will succeed |
| नहिं | नहीं | not |
| बाता | बात; प्रयोजन | the purpose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 414
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 413, 414
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।