अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीलु सनेहु छाड़ि नहिं जाई। असमंजस बस भे रघुराई।।
मूल पाठ
सीलु सनेहु छाड़ि नहिं जाई। असमंजस बस भे रघुराई।।
लोग सोग श्रम बस गए सोई। कछुक देवमायाँ मति मोई।।
स्रोत अभिलेख 2.85 · पुस्तक पृ. 413, 414
भावार्थ
मूल पाठ के बादशील और स्नेह छोड़ा नहीं जाता। श्रीरघुनाथजी असमञ्जसके अधीन हो गये (दुविधामें पड़ गये)। शोक और परिश्रम (थकावट) के मारे लोग सो गये और कुछ देवताओंकी मायासे भी उनकी बुद्धि मोहित हो गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 414 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीलु सनेहु छाड़ि नहिं जाई। असमंजस बस भे रघुराई।।
English explanation
Courtesy and affection could not be set aside; Rama, lord of the Raghu lineage, was caught in a dilemma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीलु | शील; सौम्य सदाचार | courtesy; gentle conduct |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| छाड़ि | छोड़ा | abandoned |
| नहिं | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | could be |
| असमंजस | असमंजस के | of a dilemma |
| बस | वश में | in the grip |
| भे | हो गए | became |
| रघुराई | रघुवंश के राजा राम | Rama, king of the Raghu lineage |
2 लोग सोग श्रम बस गए सोई। कछुक देवमायाँ मति मोई।।
English explanation
Overcome by grief and fatigue, the people fell asleep; divine illusion also somewhat clouded their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोग | लोग | the people |
| सोग | शोक | grief |
| श्रम | थकान | fatigue |
| बस | वश में | overcome by |
| गए | गए | became; fell |
| सोई | सो | asleep |
| कछुक | कुछ हद तक | somewhat |
| देवमायाँ | देवमाया ने | divine illusion |
| मति | बुद्धि को | their minds |
| मोई | मोहित कर दिया | bewildered; clouded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 414
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 413, 414
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