अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनम मरन सब दुख भोगा। हानि लाभ प्रिय मिलन बियोगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजन्म-मरण, सुख-दु:खके भोग, हानि-लाभ, प्यारोंका मिलना-बिछुडऩा, ये सब हे स्वामी! काल और कर्मके अधीन रात और दिनकी तरह बरबस होते रहते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 468 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनम मरन सब दुख भोगा। हानि लाभ प्रिय मिलन बियोगा।।
काल करम बस हौहिं गोसाईं। बरबस राति दिवस की नाईं।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 468, 468
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जनम मरन सब दुख भोगा। हानि लाभ प्रिय मिलन बियोगा।।
English explanation
Birth, death, all experiences of suffering, loss, gain, and meeting with or separation from loved ones—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनम | जन्म | birth |
| मरन | मृत्यु | death |
| सब | सभी | all |
| दुख | दुःख के | of suffering |
| भोगा | अनुभव | experiences |
| हानि | हानि | loss |
| लाभ | लाभ | gain |
| प्रिय | प्रियजनों से | with loved ones |
| मिलन | मिलना | meeting |
| बियोगा | बिछुड़ना | separation |
2 काल करम बस हौहिं गोसाईं। बरबस राति दिवस की नाईं।।
English explanation
My lord, all these occur under the sway of time and deeds, inevitably, like night and day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | समय के | of time |
| करम | कर्म के | of deeds |
| बस | अधीन | under the sway |
| हौहिं | होते हैं | occur |
| गोसाईं | हे स्वामी | my lord |
| बरबस | अनिवार्य रूप से | inevitably |
| राति | रात | night |
| दिवस | दिन | day |
| की | के | of |
| नाईं | समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 468
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 468, 468
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।